“बाहुबली” के माध्यम से एस.
एस. राजमोली ने जो सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित किये है वाकई राजमोली और उनकी
टीम बधाई की पात्र है. यदि सच कहा जाये तो ये सफलता है मेहनत और लगन की जिसने 8
साल के सपने को साकार किया है सच में कल्पनाशीलता और तकनीक के समागम का ये जादुई
संसार सर चढ़ कर बोलता है मै स्वयं इस फिल्म को तीन बार देखने के बाद भी. पुनः इसे
देखने को लालाईत हूँ ...परन्तु प्रश्न ये है की क्या राज मोली के इस रचनात्मक
कीर्तिमान के बाद भारतीय सिनेमा में तकनीक और बड़े बजट की भव्यता का एक नया सिनेमाई
दौर आरम्भ होगा .....क्या यथार्थवादी सिनेमा का अस्तित्व नहीं रहेगा ....खैर जो भी
हो ये तो भविष्य के गर्भ में है
हाँ इस समय बधाई देना चाहूँगा बाहुबली के पिता को
यानि की एस. एस. राजमोली के पिता विजेंद्र प्रसाद जी को जिनकी लिखी दो फिल्मे एक
साथ सिनेमाघरों में है “बाहुबली” और “बजरंगी भाई जान”

Shandar bhai
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