Sunday, 6 October 2013

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Thursday, 19 September 2013

करबद्ध क्षमायाचना

कामनाये मोक्ष की और भावनाएं भोग की
जिंदगी जंजाल है बस इसी संजोग की
 चाहता हूँ सब सही हो किन्तु हो पाता नहीं
 कब अवज्ञा हो गई कुछ समझ आता नहीं 
इस विकट सग्राम को किस शस्त्र से लडूँ ?
आपसे "उत्तम क्षमा" मिले तो फिर में आगे बढूँ ...
मन वचन कर्म से प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष में मेरे द्वारा यदि आपको कष्ट हुआ हो तो आत्मशुद्धि के इस पावन पर्व पर करबद्ध क्षमायाचना - भूषण जैन 

Saturday, 23 February 2013

अभी कुछ दिनों से फिल्मो में किताबो उपन्यासों से कहानी लेकर फिल्म बनाने का जो सिलसिला चल पड़ा है काबिलेतारीफ़ है इस लिए नहीं की फ़िल्मकार मूल रचना को उलटफेर कर के प्रस्तुत करते है या साहित्य की आत्मा ही मार देत३ए है बल्कि इसलिए की मूल रचना और उसपर आधारित फिल्म में क्या अंतर है जानने के लिए ही सही कम से कम हमारे युवा साहित्य को पढने तो लगे है और दूसरा ये की घिसी पीती फार्मूला फिल्मो से निजत मिली कुछ नया देखने को मिलने लगा धन्यवाद्