Friday, 14 August 2015

"Baahubali the beginning" और मेरी सोच

       जैसा की आप जानते ही है अभी अभी एस एस राज मौली की फिल्म “बाहुबली द बिगनिंग” 250 करोड़ की निर्माण लागत, भव्य सेट और विशेष द्रश्य प्रभाव से जादुई संसार रचने वाली वाली फिल्म है, जिसने लगभग 600 करोड़ का व्यवसाय किया और देश की पहली ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म का इतिहास रच दिया अवश्य ही इसके लिए राज मौली और उनकी पूरी टीम बधाई की पात्र है
       एक फिल्म विद्यार्थी होने के नाते मैंने ये फिल्म सात बार देखि और इससे तो कुछ सिखने वाले तत्व पाए वो आपके साथ बाटना चाहता हूँ
मेरी समझ के अनुसार बाहूबली की कहानी का जो काल है वो लगभग 8वी शताब्दी के आसपास  होना चाहिए. और ये कहानी युद्ध, राज्य लिप्सा और नायक की बहाद्दुरी, सह्रदयता और प्रेम की कहानी है 
साथ ही विशेष गौर करने वाली बात यह की लेखक ने मध्य प्रदेश के मालवा निमाड़ को उल्लेखित किया है, हो सकता है की ये महज़ एक संयोग हो फिर भी मुझे उज्जैन वासी होने के नाते प्रसन्नता देता है, जैसे महिष्मति निमाड़ के महेश्वर का ही एक नाम है और स्वामी जी द्वारा शिवा की माँ को कहना की “शिव की शक्ति जानती हो मन से महाकाल का अभिषेक करो“ एवं नायिका तमन्ना भाटिया का नाम फिल्म में “अवंतिका” होना जो की उज्जैन का ही दूसरा नाम है   
फिल्मकी शुरुआत एक राजसी बालक को एक आदिवासी परिवार द्वारा बचाने से होती है और वही परिवार उसे पालता है ..बचपन से ही वो जल पर्वत पर चढ़ने का प्रयास करता है लेकिन सफल नहीं हो पता एक दिन उसे जल पर्वत के झरने से एक लकड़ी का मुखोटा प्राप्त होता है जिसकी बालू पर प्रतिकृति उसे जल पर्वत पर चढ़ने की काल्पनिक प्रेरणा देती है और अंततः शिवा पर्वत के शिखर पर पहुँच जाता है परन्तु वहां पहुचने पर उसे एक अलग ही कथानक से रूबरू होना पड़ता है जहां उसे मालुम होता है की वह महिष्मति साम्राज्य का उत्तराधिकारी है जो की उसकी सोच से परे था आप कभी नहीं जान पाते की आपके एक लक्ष्य को प्राप्त करने के बाद आगे कोनसा लक्ष्य आपके लिए तय्यार खड़ा है जो आपको किस उंचाई तक ले जाएगा लेकिन इस सब के लिए जरुरी है की आप अपने प्रथम लक्ष्य को हासिल करे
फिल्म में महिलाओं को सामान अधिकार और सम्मान देना अच्छा लगा फिल्म की कहानी के अनुसार आदिवासियों का नेता अवंतिका को भल्लाल देव(राणा दुग्गावती) को मार कर देवसेना(अनुष्का) को छुडवाने की जवाबदारी देता है वही दूसरी और शिवगामिनी(रम्या कृष्णन) महिष्मति के राजा और स्वयं के देवर के मरने के बाद राज्य का भार स्वयं ले लेती है जबकि उसका पति बिज्जलदेव (नज़ीर) ये कर सकता था जिसे की अपंगता के कारण राज्य नहीं मिला किन्तु शिवगामिनी आगे आकर अपना कर्त्तव्य निभाती है वो भी बिना किसी पद को ग्रहण करे वो कहती है “वो स्थान मेरा नहीं है .........मेरा वचन ही है शासन”
युद्ध में मैदान में भी शिवगामिनी की उपस्तिथि के द्रश्य महिलाओ को पुरुषो के सामान ला खड़ा करते है और एक शिक्षा भी देते है की किसी भी जिम्मेदारी को निभाने या अग्रगामी बनने के लिए किसी पद की आवश्यकता नहीं है बस अपने कर्त्तव्य को निष्ठा पूर्वक पालन करने की आवश्यकता है
भल्लाल और बाहुबली को बचपन से अस्त्र शस्त्र शास्त्र निति की शिक्षा दी जाती है ताकि उनमे से कोई एक भविष्य में अपने आप को महिष्मति साम्राज्य का शासक सिद्ध कर सके फिल्म के एक द्रश्य में बाबुबली अपना राजसी भोजन छोड़ कर कटप्पा(सत्य राज) जो की महिष्मति का वफादार गुलाम है के साथ उसका भोजन करना चाहता है काफी न नुकुर के बाद बाहुबली के प्रेम के कारण अंततः कटप्पा  बाहुबली को अपना भोजन देता है ये घटना बाहुबली को उन लोगो के दिल में एक स्थान देती है और भल्लाल से अलग साबित करती है ...एक सफल राजा वही है जो किसी भय के कारण नहीं बल्कि प्रेम और सम्मान के कारण प्रजा के दिल में रहे
किस प्रकार निति पूर्वक कम संसाधनों का पूर्ण उपयोग कर चार गुना शक्तिशाली शत्रु का मुकाबला किया जाए करना जाये यह भी कथानक में बताया गया जैसे की कालकेय के पास 100000 सेनिक है लेकिन महिष्मति के पास 25000 जाहिर सी बात है की कालकेय को उसका फायदा मिलेगा परन्तु बाहुबली (प्रभास) त्रिशूल विह्यु रचना की सलाह देता है जो की पहले किसी ने नहीं अपनाई थी बिज्जल देव उसे स्वीकार नहीं करते क्योकि त्रिशूल विह्यु किताबी उदाहरण है लेकिन शिवगामिनी और भाल्लाल सहमति देते है “क्योकि जब किसी ने त्रिशूल विह्यु का उपयोग नहीं किया तो कालकेय ने भी नहीं किया होगा” और उपलब्ध 25000 सैनिकों में से 10000 बाहुबली के नेतृत्व में और 10000 भाल्लाल देव के नेतृत्व में दो तरफ से आक्रमण करेंगे और कट्टपा (सत्य राज) 5000 सैनिको के साथ मुख्य द्वार का बचाव करेंगे इस प्रकार प्रयेक सेनिक और उपलब्ध संसाधन का पूर्ण उपयोग किया गया
नायक आवश्यकता होने पर आविष्कार करता है ये भी शिक्षाप्रद है ....बिज्जलदेव चालाकी से तलवारों वाला रथ और एक बार में सहस्त्रों तीर चलाने वाले सारे उच्च कोटि के अस्त्र भाल्लाल को दे देते है और किले की दीवारे गिराने के काम आने वाले अस्त्र बाहुबली को देते है ....कटप्पा के कहने पर बाहुबली सामान अस्त्रों की मांग कर सकता था किन्तु उसने कुछ नया सोचा उसने ज्वलनशील तेल में भीगा कपडा किले की दिवार तोड़ने वाले गोलों से बांध कर दाग दिए जिससे शत्रु सेना अचंभित थी वो कुछ समझते इससे पहले बाहुबली तीर द्वारा उन कपड़ो में आग लगा कर सेकड़ों दुश्मन सेनिको को मार गिराता है  तात्पर्य यह की जो साधन प्राप्त है उन्ही से कुछ ऐसा किया जाए की सफलता प्राप्त हो
एक अग्रगामी या नायक की भूमिका उसके अपने दल में उत्साह के संचार और उसे बनाये रखने की भी होती है और यही सफलता का द्योतक है ऐसा ही उदाहरण बाहुबली द्वारा प्रस्तुत किया गया ...कालकेय के विरुद्ध युद्ध में जब महिष्मति के सैनिक मरने लगते है और उनमे म्रत्यु का डर घर कर जाता है और तब वे रण भूमि से भागने लगते है तब बाहुबली उन्हें रोक कर पूछता है
“महासेना! क्या है म्रत्यु ....हमारे आत्म बल से शत्रु का बल ज्यादा है ये सोचना है म्रत्यु!  रणभूमि में शत्रु से भयभीत होकर जीवित रहना है म्रत्यु!   जिस नीच ने हमारी माँ का अपमान किया वो हमारी आँखों के सामने अट्टहास कर रहा है उसका सिर काट कर माँ के चरणों में अर्पित करने की जगह पीठ दिखाकर भागना है म्रत्यु ....मेरी माँ और मात्रभूमि को कोई नीच छू नहीं सकता ये उस नीच को मारकर उसे बताने रहा हूँ मै .. मेरे साथ आएगा कोन”
ये एक ऐसी पुकार थी जो महिष्मति के सैनिकों को पुनः लड़ने के लिए प्रेरित करती है और कालकेय पर महिष्मति को विजय दिलाती है  किन्तु दूसरी और भाल्लाल्देव को ऐसी परिस्तिथि में कोई फर्क नहीं पड़ता.....यहाँ ये सिखने योग्य बात है की अग्रगामी को साथ में रहकर प्रेरणा देकर परिस्तिथियों का हल निकालना चाहिए 
      उस युद्ध में एक प्रतियोगिता भी थी की जो कोई भी युवराज कालकेय सेना नायक का वध करेगा वो ही महिष्मति साम्राज्य का शासक होगा
    युद्ध में भाल्लाल देव का ध्यान केवल और केवल कालकेय को मारने का मौका पाने की कोशिश में था   
यहाँ तक की एक द्रश्य में कालकेय अपने बचाव के लिए महिष्मति के नागरिको को बंधक बना कर सेना के आगे कर देता है तब भाल्लाल देव अपने ही राज्य के निर्दोष नागरिको को मार कर आगे बढ़ जाता है जब की सामान परिस्तिथि में बाहुबली बड़ी चतुराई से पहले नागरिको को सुरक्षित कर के कालकेय सेना पर आक्रमण करता है बाहुबली का ऐसा ही दया का चरित्र युद्ध के पूर्व देवी माँ काली के समक्ष होने वाली बलि के समय भी प्रगट होता है भाल्लाल देव जहां निरीह पशु की बलि स्वयं देता है वहीँ बाहुबली इस बलि को निराधार बताते हुए बलि नहीं देता और स्वयं का रक्त देवी को अर्पित करता है इन दोनों द्रश्यो में ये बात सिद्ध होती है की मानवता सर्वोपरि है और एक राजा में प्रजा और निरीह प्राणियों के प्रति दया भाव अवश्य होना चाहिए
        खैर बाते तो बहुत है क्योकि 7 बार फिल्म जो देखि है फिर भी अंत में कहूँगा बहुत ही अच्छी फिल्म है कल्पना का बहुत ही सुन्दर साम्राज्य कलाकारों का दमदार अभिनय वेशभूषा इत्यादि ने जो जादू रचा उसके जादूगर एस एस राजा मोली और साथियों के साथ ही बाहुबली फिल्म के कल्पनाशील लेखक विजेंद्र प्रसाद  जी  को साधुवाद जिन्होंने इस फिल्म का कथानक लिखा और इतनी शिक्षा दी बहरहाल 2016 में प्रदर्शित होने वाले अगले भाग “बाहुबली द कन्क्लूजन” के इंतजार में.....भूषण एन. जैन

Monday, 10 August 2015

Film "Masaan" "fly away solo" n Dushyat kumar

तू  किसी  रेल  सी  गुजरती  है
मैं  किसी  पुल  सा  थरथराता  हूँ
इन पंक्तियों के साथ साथ बनारस के प्राचीन पुल के ऊपर दूर से रेल का गुजरना अच्छा लगता है
कुल मिला कर मसानपर दुष्यंत कुमार का प्रभाव दिखा मै भी दुष्यंत जी से प्रभावित हूँ पर कभी मुलाकात नहीं हुई उनकी रचनाएं अवश्य नाटको में उनसे रूबरू कराती रही है परन्तु अगर आज की पीढ़ी की बात करे तो शायद हालत कुछ ऐसे है यहाँ दरख्तों के साए में धुप लगती है क्यों की आज के नौजवान मसान फिल्म के  दीपक की तरह ही सवाल करता है जैसे कौन ग़ालिब और कौन निदा फ़ाजली
खैर अंत मै एक बार फिर कहूँगा की मुझे दुष्यंत जी की पूरी कविता ही फिल्म की कहानी लगी

एक जंगल है तेरी आँखों में
मै जहां राह भूल जाता हूँ
मै तुझे भूलने की कोशिश में
आज कितने करीब पाता हूँ
तू किसी रेल सी गुजरती है
मै किसी पुल सा थरथराता हूँ
हर तरफ एतराज होता है
मै अगर रौशनी में आता हूँ
एक बाजू उखड गया जब से
और ज्यादा वजन उठता हूँ
एक जंगल है तेरी आँखों में..

फिल्म बहुत उम्दा है बधाई नीरज भाई