Saturday, 23 February 2013

अभी कुछ दिनों से फिल्मो में किताबो उपन्यासों से कहानी लेकर फिल्म बनाने का जो सिलसिला चल पड़ा है काबिलेतारीफ़ है इस लिए नहीं की फ़िल्मकार मूल रचना को उलटफेर कर के प्रस्तुत करते है या साहित्य की आत्मा ही मार देत३ए है बल्कि इसलिए की मूल रचना और उसपर आधारित फिल्म में क्या अंतर है जानने के लिए ही सही कम से कम हमारे युवा साहित्य को पढने तो लगे है और दूसरा ये की घिसी पीती फार्मूला फिल्मो से निजत मिली कुछ नया देखने को मिलने लगा धन्यवाद्

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